banner

" NationFirst Community is for those who Love India and want to improve social and political system of our Country. Your suggestions will help all of us. "


आरक्षण का जिम्मेदार कौन?

हम जनरल वाले समानता के अधिकार के लिए लड़ने में इतना हिचकते क्यों हैं, जातिगत आरक्षण विरोधी पोस्ट शेयर करने में हमें सोचना क्यों पड़ता है। मैं पूछता हूँ कि ये हिचक उन्हें क्यों न हो जो जातिगत आरक्षण के खिलाफ सुनते हीं तिलमिला उठते हैं। जाति आधारित आरक्षण पाने के लिए राष्ट्रद्रोह पर भी उतर जाते हैं, रेल लाइन उखाड़ देते हैं, आम नागरिक को नुकसान पहुचते हैं। किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचते हैं, जो आरक्षण के लिए लड़े उसे भगवान और जो समानता और उनके अधिकारों के लिए लड़े उसके लिए अभद्र भाषा का प्रयोग करते है उसे दलित विरोधी कहते हैं। (नोट:- महात्मा गांधी आरक्षण के बजाय समानता को ज्यादा महत्वपूर्ण मानते थे),। हम लोग तो सिर्फ भारत में समानता के अधिकार के लिए लड़ रहें हैं, हमें किस बात की हिचक है???? मुझे लगता है हम जनरल वाले अपने हालात के खुद जिम्मेदार है, क्यों कि कभी हमने अत्याचार के खिलाफ लड़ने वाले अपने लोगों को सपोर्ट नही किया तो कभी हम खड़े हुए तो हमें अपनो का सपोर्ट नहीं मिला। हमें हमेसा यह देखना चाहिए कि वो कौन लोग हैं जो हमारे हक्क की लड़ाई लड़ रहे हैं वो भी बिना कोई फायदा के, हमारे हक्क के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिए है, हम गलत के खिलाफ बोलने से कतराते हैं तो वहीं कुछ लोग उसके खिलाफ जंग लड़ रहे है, हम अपना 1 घंटे समय भी गलत के खिलाफ आवाज उठाने में नहीं दे सकते तो वहीं कुछ लोग अत्याचार के खिलाफ लड़ने के लिए अपना पूरा जीवन चुन लिए हैं। क्यों? क्या ये लोग हमारे हिस्से की लड़ाई खुद नहीं लड़ रहे हैं जो वास्तव में हमें लड़ना चाहिए था? हमें ये सोचना चाहिए। और अगर आप नही सोच पा रहें हैं तो मुझे लगता है आप वही लोग हैं जिसे मीडिया में मुख दर्शक के नाम से जाना जाता है। आप वही मुख दर्शक लोग हैं जिसे रास्ते में चलते हुए कहीं कोई सड़क दुर्घटना का शिकार व्यक्ति मिल जाए तो सोचते हैं हम क्या कर सकते हैं कोई न कोई तो आएगा इसे हॉस्पिटल ले जाने। और ले भी क्यों जाएं इसमे मेरा परिवार का सदस्य तो है नही। आप सोचते रह जाते है। अगर उस व्यक्ति का लक ठीक रहता है तो कोई आ जाता है मदद के लिए बरन मर जाने पर आप उसकी एक फोटो ले कर चले आते है और व्हाट्सएप्प पे पिक्चर शेयर कर के दुख जता देते हैं। आपको क्या टेंशन आप तो कभी रोड पर निकलते ही नही है, आप तो वरदान ले कर आये है कि आपके साथ रोड पर कभी कोई गलती नही होगी, क्योंकि आपसे अच्छा ड्राइव तो कोई करता ही नही है? मुझे लगता है आप संभवतः वही लोग होंगे जिनके सामने अगर कोइ लड़की के साथ अभद्र व्यवहार होता होगा तो सोचते होंगे 'अरे कौन बीच में पड़ने जाता है कुछ दिक्कत हो गया तो?, और इस लड़की को उलट कर जवाब देने का क्या जरूरत था, थोड़ा इग्नोर नहीं कर सकती थी,। और हम क्यों बीच में पड़े मेरी बहन- बेटी थोड़ी न है?, मेरी बहन बेटियों के साथ ऐसा तो कभी होने नहीं वाला है?, क्योंकि वो कभी किसी को नजर उठा कर भी नही देखती, छोटे कपड़े नहीं पहनती, रात में कभी बाहर नही जाती, और भी बहुत कुछ उदाहरण तो कई है पर मैंने यहां दो मुख्य उदाहरण दिया है क्योंकि आज आरक्षण के खिलाफ लड़ाई में हमलोगों के साथ ऐसा ही हो रहा है। सब सोचते हैं ' हम क्यों अपना टाइम आरक्षण के मुद्दे पर बर्बाद करें हम तो बचपन से पढ़ने में तेज हैं ही, कोई गवर्नमेंट एग्जाम निकालना तो मेरे बाएं हाथ का खेल है और जो आरक्षण का विरोध करने में लगे हैं वो पढ़ाई बगेरह तो करते नही होंगे?, एक बार एग्जाम नहीं निकला होगा तो सब कुछ छोड़ छाड़ कर आरक्षण का विरोध करते रहते होंगे। मेरा एग्जाम निकल जायेगा तो फिर हमको आरक्षण से क्या लेना है, मेरे आगे पीछे तो कोई है नही जिसको ये फिर झेलना होगा और बोलेगा हम भारत में जन्म क्यों लिए? हम फेसबुक पे आरक्षण के खिलाफ कुछ भी नहीं पोस्ट करेंगे, नहीं तो सब सोचेगा ये पढ़ाई बगेर नहीं करता है मन से, और सिस्टम को दोष देता है, ये दलित विरोधी है, ये गांव का रहने वाला, जात पात मानने वाला है। मुझे पता है बहुत लोग ऐसा सोचते होंगे। अगर आपकी सोच भी ऐसी है तो आप ऊपर में दिए गए दोनों उदाहरण से अपने सोच की तुलना कर लें आपको पता चल जाएगा आप कितने सही हैं।।।।।।

0 Comments